कागद राजस्थानी

रविवार, 2 जून 2013

प्रीत ( पंचलड़ी )

मत पाळजै थूं प्रीत बावळी ।
प्रीत री भूंडी मार बावळी ।।
खुद काटै खुद रै हाथां नाड़ ।
आ तलवार री धार बावळी ।।
पंपोळ अदीठ घावां दिलड़ै । 
रोयसी धारोधार बावळी ।।
जूण जमारो प्रीत रै आगै ।
होयसी लीरो लीर बावळी ।।
काया झुरसी कुढसी हिंवड़ो ।
ओ ई प्रीत रो सार बावळी ।।

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