कागद राजस्थानी

रविवार, 2 जून 2013

बजटिया दूहा

बजट बणायो आपरो, म्हारो दियो बिगाड़ ।
जनता थांरो बापजी, कांईं दियो उजाड़ ।।
थे मांगो जद बोटड़ा, म्हे घालां अणथाग ।
आप बुझाई बापजी , म्हारै चूल्हां आग ।।
जेब काटली आप तो, म्हां सूं अळगा बैठ ।
कूकर बणसी बापजी, म्हारै काळजां पैठ ।।
भाव बधाया जिंस रा, अंटी कोनीं दाम ।
भूखा मरता बापजी, कियां बचावां चाम ।।
गरीब भरसी टैक्सड़ा, लूंठा करसी ठाठ ।
रगत चूसणां बापजी, कद छोडोला पाठ ।।

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